1984: Angrezi Saahity Par Aamit Chaap Chodne Wala Upanayaas Nineteen Eighty Four Ka Saral Rupanatran - Hardcover

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Author : George Orwal
Publisher : Saraswati Vihar (2005-02)
Hardcover : 240 pages
ISBN 10 : 812161015X
Language : Hindi
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ISBN: 9788121610155
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उन्नीस सौ चैरासी (Nineteen Eighty Four) इंग्लैंड के महान उपन्यासकार जाॅर्ज आॅरवेल (George Orwell) का दुनिया - भर में चर्चित कालजयी उपन्यास है। यह अपने प्रकाशन के तत्काल बाद ही सफल उपन्यासों में गिना जाने लगा।आॅरवेल की भविष्य की दिल दहला देने वाली इस कल्पना में समाज का नियन्त्रण ‘बड़े भाई’ के हाथों में है। ज़िन्दगी के छोटे - से - छोटे पहलू पर टेलीस्क्रीन से नज़र रखी जाती है और ‘बड़े भाई’ के विरोध में उठने वाली आवाज़, या कहें कि क्षणमात्र के विचार को भी विचार - पुलिस द्वारा जड़ से उखाड़ दिया जाता है।इस तरह जाॅर्ज आॅरवेल ने कथा के नायक विन्स्टन के चरित्र में उतरकर वर्षों बाद आने वाले समय की काल्पनिक कहानी लिख डाली, लेकिन वह तस्वीर सच्ची थी, सजीव और रोमांचकारी थी। मानवीय करुणा का विलक्षण दस्तावेज़ थी। भविष्य के सामाजिक व राजनीतिक जीवन की ऐसी अनोखी कल्पना कहीं और नहीं मिल सकती। सन् 1903 की 25 जून को भारत के मोतीहारी में जन्मे थे जाॅर्ज आॅरवेल, लेकिन शिक्षा उन्होंने इंग्लैंड में प्राप्त की थी। सन् 1922 में वह इम्पीरियल पुलिस सर्विस में भर्ती होकर बर्मा (म्यांमार) चले गए। वह साम्राज्यवाद के खि़लाफ़ थे। इसीलिए यह नौकरी छोड़ दी और फिर मामूली नौकरियां करते रहे। इसके लिए पेरिस में रहे और फिर लन्दन आ गए। लेखक बनने के बाद ही अभावों ने उनका दामन छोड़ा। जाॅर्ज आॅरवेल का असली नाम एरिक आर्थर ब्लेयर था, पर दुनिया ने उन्हें लेखकीय नाम से ही जाना। उपन्यासों के अलावा उन्होंने निबन्ध भी लिखे। सन् 1945 में उनका छोटा - सा उपन्यास ‘एनिमल फ़ार्म’ आया और वह प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंच गए, लेकिन उसके चार साल बाद ही उनका एक और उपन्यास ‘नाइनटीन एटी फ़ोर’ आया और यह इतना सराहा गया कि उनकी गिनती बीसवीं सदी के बड़े उपन्यासकारों में होने लगी। शायद यही उनका आख़री कलाम था, क्योंकि इसके 6 मास बाद 21 जनवरी, 1950 को वह दुनिया छोड़ गए।